Chhattisgarh

छन्नी साहू के विधानसभा क्षेत्र में साहू परिवार की सामंती बलि, पुलिस विभाग मौन,क्षेत्र में दहशत का माहौल

राजनांदगांव। जिले के खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के छुरिया के ग्राम टीपानगढ़ में  ऐसा कुछ हुआ कि मानवता शर्मसार हो गयी। सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहे एक परिवार के कुछ लोग काल के गाल में समा गए तो कुछ लोग अब जिंदगी भर मौत के बीच लड़ाई लड़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक लगभग एक महीने पहले गांव के एक साहू परिवार को गांव के नियम कानून को नहीं मानने पर गांव से बहिष्कृत कर दिया गया और फरमान जारी कर दिया गया कि उस गरीब परिवार से कोई बातचीत नहीं करेगा, कोई किराना सामान नहीं देगा, और तो और गांव से कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार का कोई सहयोग नहीं करेगा और जो करेगा उन्हें भी गांव से बहिष्कृत कर दिया जाएगा। डरे सहमे परिवार ने गांव के दबंगो के फैसले के बाद अपने आपको अपने घर के एक कमरे में बंद कर लिया, जहां से उस परिवार की मौत हो गई और बच्चे अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़  रहे हैं। सवाल यह है कि क्या वजह रही कि सामाज के ठेकेदारों से लेकर, ग्रामीण मुखिया, शासन के लोग, प्रशासन के लोग चुप्पी साधे बैठे हैं।
 
जानकारी के अनुसार पीड़ित साहू परिवार ने इस घटना की जानकारी प्रशासन को नहीं दी थी लेकिन जब घटना हुई थी तो पुलिस प्रशासन को गांव के कोटवार के द्वारा जानकारी तो मिल ही गई होगी। इसके बावजूद अब तक मामले को लेकर कोई जांच व कार्यवाही क्यों नहीं हुई ? यह बड़ा सवाल है। 
 
साहू समाज की चुप्पी समझ से परे
मामला साहू समाज से जुड़ा हुआ है प्रदेश में साहू समाज से गृह मंत्री है जिस क्षेत्र में घटना हुई वहां की विधायक साहू समाज से आती हैं लेकिन साहू परिवार की सामंती बलि को लेकर सभी चुप हैं जिले में साहू समाज की बहुलता है जिसे लेकर साहू समाज राजनीतिक लाभ उठाते हुए विधायक बनने व सांसद बनने तक की प्रयास में लगे रहते हैं तो क्या यह मानकर चलें समाज का उपयोग केवल विधायक और सांसद बनने के लिए किया जाता है। 
 
चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियां टिकिट वितरण के समय जातिगत समीकरण का पूरा ध्यान रखती है ताकि किसी समाज विशेष के मताधिकार का पूरा लाभ उठाया जा सके। लेकिन वही राजनीतिक पार्टी और उनके जनप्रतिनिधि अपने समाज को सिर्फ मतदान के दिन तक याद रखती है। उसके बाद समाज में लोग जिये या मरे अगले चुनाव तक उन्हें इसका जरा भी जानकारी नहीं होती न ही वे जानकारी लेने का प्रयास करते हैं। उन्हें बस वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने के बाद उनके हाल में मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।

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