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शिष्टाचार मुलाकात...भूपेन्द्र साहू से दिनेश साहू का...

तोर मया के मारे,मया दे दे मया ले ले,परदेसी के मया, मया देदे मयारू,बईरी सजन अभी हाल ही मे  फिल्म दईहान।छत्तीसगढ़ी फिल्म हो या गीत संगीत पटकथा या निर्देशन भूपेन्द्र भईया रंग सरोवर मया के मड़वा आरंभ फिल्म का नाम नही आया तो फिर कुछ नही, दिनेश साहू का कहना है की छत्तीसगढ़ मे जो छत्तीसगढ़ी लोक गीत संगीत की परम्परा की शुरुआत हुई काफी कुछ श्रेय उनके परिवार को भी जाता है और आज भी उनकी तीसरी पीढ़ी इसी क्रम मे दिखाई दे रही है,और हमे तो गर्व भी होना चाहिए कि हमारी संस्कृति और सभ्यता को आज भी फुहड़ता से बचाए हुए हैं ये जो भी करतें हैं चाहे फिल्म हो या गीत संगीत के माध्यम से हमारी संस्कृति को बढ़ावा देने के अलावा संदेश देने का भी कार्य किया।इन्होंने जो फिल्म या एलबम बनाई हमारी संस्कृति समाज को ध्यान मे रख कर बनाई जिसमे कहीं भी फुहड़ता नजर नहीं आई जो आज यही इनकी अलग पहचान बन गई। दिनेश साहू ने काफी दिनो बाद उनसे मिलने गये, दिनेश उनसे पारिवारिक मधुर संबंध रहा है,भईया ज्यादातर अपने पैतृक गांव बारूका मे बिताते हैं। यहां का काम जहां उन्होंने (अमलीडीह रायपुर) मे स्टूडियो डाला है,जिसका संचालन उनके बड़े सुपुत्र मलयज (मणि) साहू करतें हैं, छोटा बेटा अभी कलिंगा यूनिवर्सिटी मे पढ़ाई कर रहा है ।

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